श्याम सुंदर पालीवाल जो हैं इको-फेमिनिज्म के जनक

संयुक्त राष्ट्र महिला सुरक्षा पुरस्कार से सम्मानित राजस्थान के छोटे से गांव पिपलांत्री में रहने वाले श्याम सुंदर पालीवाल जो कि किसानी करके अपना और अपने परिवार का लालन पोषण करते थे, लेकिन फिर उनकी जिंदगी में एक मोड़ आया और वह आज कई पुरस्कारों से सम्मानित और इको-फेमिनिज्म के जनक के रूप में जाने जाते हैं।


श्याम सुंदर पालीवाल
श्याम सुंदर पालीवाल

कौन हैं श्याम सुंदर पालीवाल

श्याम सुंदर पालीवाल वह व्यक्ति हैं जो अपने गांव पिपलांत्री किससे सुधारने के लिए इकोफेमिनिज्म की शुरुआत की। राजस्थान पिपलांत्री गांव में जलस्तर और पारिस्थितिकी की हालत बहुत खराब थी जिस कारण गांव के लोग शहर की ओर पलायन करने लगे वही श्याम सुंदर पालीवाल वह व्यक्ति थे जिन्होंने बेहतर अवसरों की तलाश में पलायन का रास्ता चुनने के बजाए अपने गांव की स्थिति सुधारने का निर्णय लिया श्याम सुंदर पालीवाल जी अपने गांव की स्थिति सुधारने के लिए 2005 में सरपंच का चुनाव लड़ा और वह चुनाव जीत गए और पिपलांत्री गांव के एक युवा सरपंच बन गए।

श्याम सुंदर पालीवाल ने अपने गांव की सामाजिक और पारिस्थितिकी दशा सुधारने के लिए "पंचायत आपके द्वार पर" कार्यक्रम की शुरुआत की जिसके तहत वह लोगों के घर जाकर उनकी समस्याओं को समझने और सुनने का काम करते थे।

श्याम सुंदर पालीवाल ने अपने गांव के जलस्तर और जल से जुड़ी अन्य समस्याओं के लिए स्वजलधारा योजना नाम से एक कार्यक्रम की शुरुआत की जिससे उनके गांव की स्थिति धीरे-धीरे सुधरने लगी।

श्याम सुंदर पालीवाल ने अपनी बेटी की याद में 111 पेड़ लगाने की शुरुआत की

श्याम सुंदर पालीवाल के जीवन में एक दुखद घटना घटी, किरण जो कि उनकी बेटी थी उन्होंने उसको खो दिया। इस दुखद घटना के बावजूद श्याम सुंदर पालीवाल अपने मिशन से नहीं हटे, और अपनी बेटी किरण की याद में उन्होंने गाँव में किसी भी घर में लड़की के जन्म होने पर 111 पेड़ लगाने की पहल की शुरुआत की। श्याम सुंदर पालीवाल ने कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए और लड़कियों की शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए लोगों को जागरूक किया। श्याम सुंदर पालीवाल गांव के किसी भी घर में लड़की का जन्म होने पर उस लड़की के नाम 10000 रुपए की आर्थिक मदद करते थे। यह पैसा लड़की के नाम से ही जमा होता जो 20 वर्ष की उम्र में लड़की को मिलता था। श्याम सुंदर पालीवाल लड़की के घर वालों से शपथ पत्र लेते थे कि वह लड़की की शिक्षा पूरी करेंगे और 18 वर्ष से पहले उसकी शादी नहीं की जाएगी।

पिपलांत्री गांव
पिपलांत्री गांव

लड़की के नाम पर लगाए गए पेडों की देखभाल उनके घर वाले करते हैं। पालीवाल के इस पहल से गांव का जलस्तर भी सुधरा और पर्यावरण में भी बदलाव आया। पिपलांत्री गांव में नीम, आम, आंवला और शीशम जैसे पेड़ों के लगने से वायु प्रदूषण भी कम हुआ साथ ही साथ गांव वालों को रोजगार भी मिलना शुरू हुआ जिससे गांव के लोगों का शहर की ओर पलायन रुक गया। कि पादरी गांव में पिपलांत्री गांव में घृतकुमारी या एलोवेरा की खेती बहुत प्रसिद्ध हुई, जिसके अनेक औषधि लाभ हैं। स्वर्गीय और तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने श्याम सुंदर पालीवाल को पुरस्कृत किया और अन्य गांव की मदद के लिए आमंत्रित किया था।

पिपलांत्री गांव
पिपलांत्री गांव

पिपलांत्री गांव में श्याम सुंदर पालीवाल के प्रयासों से शौचालय बिजली और अन्य सुविधाओं में भी काफी सुधार हुआ। पालीवाल के इन्ही प्रयासों से पिपलांत्री गांव ने निर्मल ग्राम पुरस्कार भी प्राप्त किया। अब देश की कई पंचायतों में "पिपलांत्री मॉडल" का पालन किया जा रहा है और पिपलांत्री ग्राम पंचायत अब खुले तौर पर ग्रामीणों, पेशेवरों और अन्य व्यक्तियों को इस मॉडल का अध्ययन करने और अपने गांवों में इसे लागू करने के लिए आमंत्रित कर रही है।

इको फेमिनिज्म क्या है?

इको-फेमिनिज्म में दर्शन और आंदोलन शामिल हैं जो नारीवाद को पारिस्थितिकी से जोड़ते हैं। यह माना जाता है कि महिलाओं और प्रकृति के बीच कुछ महत्वपूर्ण संबंध हैं। एक ऐसा समाज जो महिलाओं का सम्मान करता है, पारस्परिकता, पोषण और सहयोग को भी महत्व देता है। कुछ समाजों में लैंगिक समानता का अभाव प्रकृति और महिलाओं के उत्पीड़न के साथ आत्म-केंद्रित, भौतिकवादी मानसिकता का भी गवाह है। राजस्थान का एक गाँव, भारत इको-नारीवादी प्रथाओं को लागू करने और प्रक्रिया में चमत्कारिक रूप से खुद को बदलने के लिए एक आदर्श बन गया है।

कौन बनेगा करोड़पति में कर्मवीर श्याम सुंदर पालीवाल

हाल ही में श्याम सुंदर पालीवाल जी फिर से एक बार चर्चा में हैं, क्योंकि उन्हें सोनी टीवी के बहुत ही लोकप्रिय प्रोग्राम कौन बनेगा करोड़पति के कर्मवीर स्पेशल एपिसोड में आमंत्रित किया गया है जिससे श्याम सुंदर पालीवाल जी द्वारा किए गए कार्य को देश के और नागरिक भी जान पाएंगे।
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